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26 दिवसीय धार्मिक अमेरिका यात्रा-शनि जयन्ती वट सावित्री व्रत 19/5/2023

जय दूधेश्वर महादेव
लक्ष्मी नारायण मन्दिर 4615 जार्ज रोड टेम्पा फ्लोरिडा अमेरिका में पूज्य गुरुदेव श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर गाजियाबाद अन्तर्राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा राष्ट्रीय अध्यक्ष दिल्ली एन सी आर सन्त महामण्डल दिल्ली के अध्यक्षता सानिध्य में लक्ष्मी नारायण मन्दिर के स्वामी जी महर्षि ओम जी महाराज , पंडित महेश वशिष्ठ जी बाबा लाल मन्दिर गाजियाबाद,विजय बाबा जी लंडन यू के , उपस्थिति में अमेरिका में निवास कर रहे भारतीय मूल के लोगों ने शनिदेव की पूजा वट वृक्ष की पूजा किया ,

यहां पर कोई प्रान्तवाद नहीं है उसको छोड़कर सभी एक साथ मिलकर कि हम सभी भारतीय है यह सोच के एक साथ पूजा में भाग लेते हैं ,आज शनिदेव का तेल से अभिषेक शनि आरती शनि होम हुआ वट वृक्ष का पूजन हुआ इन सभी चीजों से प्रेरित होकर सभी हमारी वैदिक सनातन संस्कृति से जुडेंगे धर्म के प्रति जागरूक होंगे ,यहां पर लोग बहुत व्यस्त रहते हैं सप्ताह में शनिवार एवं रविवार को समय निकाल कर भगवान के दर्शन पूजन करना है , स्वामी ओम जी महाराज पिछले 30 वर्षो से ध्यान योग के माध्यम से लोगों जागरूक कर रहे हैं जो अपनी प्राचीन संस्कृति से भारतीय सहित अमेरिकी मूल के लोगों को भी ध्यान योग के माध्यम से मन की शान्ति प्राप्त करने का मार्ग दर्शन कर रहे हैं ।शनि जयन्ती :-सूर्य-पुत्र शनि देव के संदर्भ में मान्यता है कि शनि जयंती के दिन भगवान शनि की पूजा करने वालों पर शनि मेहरबान रहते हैं.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव की विधि-विधान के साथ पूजा एवं अनुष्ठान करने से जीवन के सारे कष्ट और पाप मिट जाते हैं. शनि जयंती के दिन शनि देव का वैदिक मंत्र जाप, पूजा-पाठ, गरीबों एवं असहाय व्यक्ति को दान अथवा मदद करने से शनि की महादशा, शनि की साढ़े साती, अथवा अढैय्या आदि से राहत मिलती है. इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार एक या ज्यादा से ज्यादा लोगों को भोजन कराने से अक्षुण्य फल प्राप्त होता है.वट सावित्री व्रत:-वट सावित्री व्रत के दिन बरगद की पूजा की जाती है, साथ ही बरगद की परिक्रमा करके सात बार सूत का धागा लपेटा जाता है और वृक्ष के नीचे सत्‍यवान सावित्री की कथा पढ़ी जाती है. इसका कारण है कि हिंदू धर्म में वट वृक्ष को पीपल की तरह ही पूज्‍यनीय माना गया है. इस वृक्ष की आयु बहुत लंबी होती है. इस कारण इस वृक्ष को अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है. 


ऐसे में सुहागिन महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करके और वृक्ष के नीचे सत्‍यवान और सावित्री की कथा पढ़कर ये प्रार्थना करती हैं कि बरगद के पेड़ की तरह उनके पति को भी दीर्घायु मिले और जिस तरह सावित्री ने अपने पति और उसके परिवार के सभी संकटों को चतुराई से दूर कर दिया था, उसी तरह हम सभी के परिवार से भी संकट दूर हों. बरगद में सात बार सूत लपेट कर हर महिला ये प्रार्थना करती है कि उसका पति के साथ सात जन्मों तक संबन्‍ध रहे और जीवन सुख और समृद्धि से बीते. ।


     हर हर महादेव
विश्व संवाद सम्पर्क सचिवअमित कुमार शर्माश्री दूधेश्वर नाथ महादेव मठ मन्दिर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

1 Comment

  • purshottam Lal Gour
    May 21, 2023

    jaiho om namo narayan

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